श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.31

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

श्‍वाहिस्ततो रुशेकुर्वै तस्य चित्ररथस्ततः।

शशबिन्दुर्महायोगी महाभोजो महानभूत्॥ ३१

śvāhistato ruśekurvai tasya citrarathastataḥ|

śaśabindurmahāyogī mahābhojo mahānabhūt|| 31

अर्थ

वृजिनवान्का पुत्र श्‍वाहि, श्‍वाहिका रुशेकु, रुशेकुका चित्ररथ और चित्ररथके पुत्रका नाम था शशबिन्दु। वह परम योगी, महान् भोगैश्‍वर्यसम्पन्‍न और अत्यन्त पराक्रमी था॥ ३१॥

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