॥ श्रीहरिः ॥
कैकेयो धृष्टकेतुश्च श्रुतकीर्तिमविन्दत।
सन्तर्दनादयस्तस्य पंचासन् कैकयाः सुताः॥ ३८
kaikeyo dhṛṣṭaketuśca śrutakīrtimavindata|
santardanādayastasya paṃcāsan kaikayāḥ sutāḥ|| 38
अर्थ
कैकय देशके राजा धृष्टकेतुने श्रुतकीर्तिसे विवाह किया था। उससे सन्तर्दन आदि पाँच कैकय राजकुमार हुए॥ ३८॥
कैकेयो धृष्टकेतुश्च श्रुतकीर्तिमविन्दत।
सन्तर्दनादयस्तस्य पंचासन् कैकयाः सुताः॥ ३८
कैकय देशके राजा धृष्टकेतुने श्रुतकीर्तिसे विवाह किया था। उससे सन्तर्दन आदि पाँच कैकय राजकुमार हुए॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.24.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 115) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/24/38/