॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.47
सुभद्रो भद्रवाहश्च दुर्मदो भद्र एव च।
पौरव्यास्तनया ह्येते भूताद्या द्वादशाभवन्॥ ४७
subhadro bhadravāhaśca durmado bhadra eva ca|
pauravyāstanayā hyete bhūtādyā dvādaśābhavan|| 47
अर्थ
पौरवीके गर्भसे उनके बारह पुत्र हुए—भूत, सुभद्र, भद्रवाह, दुर्मद और भद्र आदि॥ ४७॥