॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.48
नन्दोपनन्दकृतकशूराद्या मदिरात्मजाः।
कौसल्या केशिनं त्वेकमसूत कुलनन्दनम्॥ ४८
nandopanandakṛtakaśūrādyā madirātmajāḥ|
kausalyā keśinaṃ tvekamasūta kulanandanam|| 48
अर्थ
नन्द, उपनन्द, कृतक, शूर आदि मदिराके गर्भसे उत्पन्न हुए थे। कौसल्याने एक ही वंश-उजागर पुत्र उत्पन्न किया था। उसका नाम था केशी॥ ४८॥