जब-जब संसारमें धर्मका ह्रास और पापकी वृद्धि होती है, तब-तब सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि अवतार ग्रहण करते हैं॥ ५६॥✎ 1396
यदा यदेह धर्मस्य क्षयो वृद्धिश्च पाप्मनः।
तदा तु भगवानीश आत्मानं सृजते हरिः॥ ५६
जब-जब संसारमें धर्मका ह्रास और पापकी वृद्धि होती है, तब-तब सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि अवतार ग्रहण करते हैं॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.24.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 117) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/24/56/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)