श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.56

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

यदा यदेह धर्मस्य क्षयो वृद्धिश्‍च पाप्मनः।

तदा तु भगवानीश आत्मानं सृजते हरिः॥ ५६

yadā yadeha dharmasya kṣayo vṛddhiśca pāpmanaḥ|

tadā tu bhagavānīśa ātmānaṃ sṛjate hariḥ|| 56

अर्थ

जब-जब संसारमें धर्मका ह्रास और पापकी वृद्धि होती है, तब-तब सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि अवतार ग्रहण करते हैं॥ ५६॥✎ 1396

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1396 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ह्रस → ह्रास

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