॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.59
अक्षौहिणीनां पतिभिरसुरैर्नृपलाञ्छनैः।
भुव आक्रम्यमाणाया अभाराय कृतोद्यमः॥ ५९
akṣauhiṇīnāṃ patibhirasurairnṛpalāñchanaiḥ|
bhuva ākramyamāṇāyā abhārāya kṛtodyamaḥ|| 59
अर्थ
जब असुरोंने राजाओंका वेष धारण कर लिया और कई अक्षौहिणी सेना इकट्ठी करके वे सारी पृथ्वीको रौंदने लगे, तब पृथ्वीका भार उतारनेके लिये भगवान् मधुसूदन बलरामजीके साथ अवतीर्ण हुए। उन्होंने ऐसी-ऐसी लीलाएँ कीं, जिनके सम्बन्धमें बड़े-बड़े देवता मनसे अनुमान भी नहीं कर सकते—शरीरसे करनेकी बात तो अलग रही॥ ५९-६०॥✎ 1396