श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.64

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स्निग्धस्मितेक्षितोदारैर्वाक्यैर्विक्रमलीलया।

नृलोकं रमयामास मूर्त्या सर्वांगरम्यया॥ ६४

snigdhasmitekṣitodārairvākyairvikramalīlayā|

nṛlokaṃ ramayāmāsa mūrtyā sarvāṃgaramyayā|| 64

अर्थ

उनका श्यामल शरीर सर्वांगसुन्दर था। उन्होंने उस मनोरम विग्रहसे तथा अपनी प्रेमभरी मुसकान, मधुर चितवन, प्रसादपूर्ण वचन और पराक्रमपूर्ण लीलाके द्वारा सारे मनुष्यलोकको आनन्दमें सराबोर कर दिया था॥ ६४॥

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