॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.24.64
स्निग्धस्मितेक्षितोदारैर्वाक्यैर्विक्रमलीलया।
नृलोकं रमयामास मूर्त्या सर्वांगरम्यया॥ ६४
snigdhasmitekṣitodārairvākyairvikramalīlayā|
nṛlokaṃ ramayāmāsa mūrtyā sarvāṃgaramyayā|| 64
अर्थ
उनका श्यामल शरीर सर्वांगसुन्दर था। उन्होंने उस मनोरम विग्रहसे तथा अपनी प्रेमभरी मुसकान, मधुर चितवन, प्रसादपूर्ण वचन और पराक्रमपूर्ण लीलाके द्वारा सारे मनुष्यलोकको आनन्दमें सराबोर कर दिया था॥ ६४॥