श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.17

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

दर्शयित्वा पतिं तस्यै पातिव्रत्येन तोषितौ।

ऋषिमामन्त्र्य ययतुर्विमानेन त्रिविष्टपम्॥ १७✎ 2042

darśayitvā patiṃ tasyai pātivratyena toṣitau|

ṛṣimāmantrya yayaturvimānena triviṣṭapam|| 17

अर्थ

उसके पातिव्रत्यसे अश्‍विनीकुमार बहुत सन्तुष्ट हुए। उन्होंने उसके पतिको बतला दिया और फिर च्यवन मुनिसे आज्ञा लेकर विमानके द्वारा वे स्वर्गको चले गये॥ १७॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2042 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): मन्त्रॺ ययतु → मन्त्र्य ययतु

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