श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.18

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यक्ष्यमाणोऽथ शर्यातिश्‍च्यवनस्याश्रमं गतः।

ददर्श दुहितुः पार्श्‍वे पुरुषं सूर्यवर्चसम्॥ १८

yakṣyamāṇo'tha śaryātiścyavanasyāśramaṃ gataḥ|

dadarśa duhituḥ pārśve puruṣaṃ sūryavarcasam|| 18

अर्थ

कुछ समयके बाद यज्ञ करनेकी इच्छासे राजा शर्याति च्यवन मुनिके आश्रमपर आये। वहाँ उन्होंने देखा कि उनकी कन्या सुकन्याके पास एक सूर्यके समान तेजस्वी पुरुष बैठा हुआ है॥ १८॥

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