कुछ समयके बाद यज्ञ करनेकी इच्छासे राजा शर्याति च्यवन मुनिके आश्रमपर आये। वहाँ उन्होंने देखा कि उनकी कन्या सुकन्याके पास एक सूर्यके समान तेजस्वी पुरुष बैठा हुआ है॥ १८॥
यक्ष्यमाणोऽथ शर्यातिश्च्यवनस्याश्रमं गतः।
ददर्श दुहितुः पार्श्वे पुरुषं सूर्यवर्चसम्॥ १८
कुछ समयके बाद यज्ञ करनेकी इच्छासे राजा शर्याति च्यवन मुनिके आश्रमपर आये। वहाँ उन्होंने देखा कि उनकी कन्या सुकन्याके पास एक सूर्यके समान तेजस्वी पुरुष बैठा हुआ है॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 16) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/3/18/