श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

राजा दुहितरं प्राह कृतपादाभिवन्दनाम्।

आ३शिषश्‍चाप्रयुंजानो नातिप्रीतमना इव॥ १९

rājā duhitaraṃ prāha kṛtapādābhivandanām|

āśiṣaścāprayuṃjāno nātiprītamanā iva|| 19

अर्थ

सुकन्याने उनके चरणोंकी वन्दना की। शर्यातिने उसे आशीर्वाद नहीं दिया और कुछ अप्रसन्‍न-से होकर बोले॥ १९॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    आशिषो न प्रयु०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 16)

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