सुकन्याने उनके चरणोंकी वन्दना की। शर्यातिने उसे आशीर्वाद नहीं दिया और कुछ अप्रसन्न-से होकर बोले॥ १९॥
राजा दुहितरं प्राह कृतपादाभिवन्दनाम्।
आशिषश्चाप्रयुंजानो नातिप्रीतमना इव॥ १९
सुकन्याने उनके चरणोंकी वन्दना की। शर्यातिने उसे आशीर्वाद नहीं दिया और कुछ अप्रसन्न-से होकर बोले॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 16) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/19/