महर्षि च्यवनने वीर शर्यातिसे सोमयज्ञका अनुष्ठान करवाया और सोमपानके अधिकारी न होनेपर भी अपने प्रभावसे अश्विनीकुमारोंको सोमपान कराया॥ २४॥✎ 1632
सोमेन याजयन् वीरं ग्रहं सोमस्य चाग्रहीत्।
असोमपोरप्यश्विनोश्च्यवनः स्वेन तेजसा॥ २४
महर्षि च्यवनने वीर शर्यातिसे सोमयज्ञका अनुष्ठान करवाया और सोमपानके अधिकारी न होनेपर भी अपने प्रभावसे अश्विनीकुमारोंको सोमपान कराया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 17) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)