॥ श्रीहरिः ॥
कालोऽभियातस्त्रिणवचतुर्युगविकल्पितः ।
तद् गच्छ देवदेवांशो बलदेवो महाबलः॥ ३३
kālo'bhiyātastriṇavacaturyugavikalpitaḥ |
tad gaccha devadevāṃśo baladevo mahābalaḥ|| 33
अर्थ
इस बीचमें सत्ताईस चतुर्युगीका समय बीत चुका है। इसलिये तुम जाओ। इस समय भगवान् नारायणके अंशावतार महाबली बलदेवजी पृथ्वीपर विद्यमान हैं॥ ३३॥
कालोऽभियातस्त्रिणवचतुर्युगविकल्पितः ।
तद् गच्छ देवदेवांशो बलदेवो महाबलः॥ ३३
इस बीचमें सत्ताईस चतुर्युगीका समय बीत चुका है। इसलिये तुम जाओ। इस समय भगवान् नारायणके अंशावतार महाबली बलदेवजी पृथ्वीपर विद्यमान हैं॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 18) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/33/