श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.3.33

नवम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कालोऽभियातस्त्रिणवचतुर्युगविकल्पितः ।

तद् गच्छ देवदेवांशो बलदेवो महाबलः॥ ३३

kālo'bhiyātastriṇavacaturyugavikalpitaḥ |

tad gaccha devadevāṃśo baladevo mahābalaḥ|| 33

अर्थ

इस बीचमें सत्ताईस चतुर्युगीका समय बीत चुका है। इसलिये तुम जाओ। इस समय भगवान् नारायणके अंशावतार महाबली बलदेवजी पृथ्वीपर विद्यमान हैं॥ ३३॥

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