उसी समय राजा शर्यातिके सैनिकोंका मल-मूत्र रुक गया। राजर्षि शर्यातिको यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ, उन्होंने अपने सैनिकोंसे कहा॥ ५॥✎ 1631
शकृन्मूत्रनिरोधोऽभूत् सैनिकानां च तत्क्षणात्।
राजर्षिस्तमुपालक्ष्य पुरुषान् विस्मितोऽब्रवीत्॥ ५
उसी समय राजा शर्यातिके सैनिकोंका मल-मूत्र रुक गया। राजर्षि शर्यातिको यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ, उन्होंने अपने सैनिकोंसे कहा॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 15) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/3/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)