श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.43

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मन्युना प्रचलद्गात्रो भ्रुकुटीकुटिलाननः।

बुभुक्षितश्‍च सुतरां कृतांजलिमभाषत॥ ४३

manyunā pracaladgātro bhrukuṭīkuṭilānanaḥ|

bubhukṣitaśca sutarāṃ kṛtāṃjalimabhāṣata|| 43

अर्थ

उस समय दुर्वासाजी बहुत भूखे थे। इसलिये यह जानकर कि राजाने पारण कर लिया है, वे क्रोधसे थर-थर काँपने लगे। भौंहोंके चढ़ जानेसे उनका मुँह विकट हो गया। उन्होंने हाथ जोड़कर खड़े अम्बरीषसे डाँटकर कहा॥ ४३॥

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