ब्रह्माजीने कहा—‘जब मेरी दो परार्धकी आयु समाप्त होगी और कालस्वरूप भगवान् अपनी यह सृष्टिलीला समेटने लगेंगे और इस जगत्को जलाना चाहेंगे, उस समय उनके भ्रूभंगमात्रसे यह सारा संसार और मेरा यह लोक भी लीन हो जायगा॥ ५३॥✎ 1635
स्थानं मदीयं सहविश्वमेतत्
क्रीडावसाने द्विपरार्धसंज्ञे।
भ्रूभंगमात्रेण हि संदिधक्षोः
कालात्मनो यस्य तिरोभविष्यति॥ ५३
ब्रह्माजीने कहा—‘जब मेरी दो परार्धकी आयु समाप्त होगी और कालस्वरूप भगवान् अपनी यह सृष्टिलीला समेटने लगेंगे और इस जगत्को जलाना चाहेंगे, उस समय उनके भ्रूभंगमात्रसे यह सारा संसार और मेरा यह लोक भी लीन हो जायगा॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 25) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/4/53/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)