ब्रह्मंस्तद् गच्छ भद्रं ते नाभागतनयं नृपम्।
क्षमापय महाभागं ततः शान्तिर्भविष्यति॥ ७१
दुर्वासाजी! आपका कल्याण हो। आप नाभाग-नन्दन परम भाग्यशाली राजा अम्बरीषके पास जाइये और उनसे क्षमा माँगिये। तब आपको शान्ति मिलेगी॥ ७१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.4.71 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 27) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/4/71/