श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

उत्थितास्ते निशाम्याथ व्युदकं कलशं प्रभो।

पप्रच्छुः कस्य कर्मेदं पीतं पुंसवनं जलम्॥ २८

utthitāste niśāmyātha vyudakaṃ kalaśaṃ prabho|

papracchuḥ kasya karmedaṃ pītaṃ puṃsavanaṃ jalam|| 28

अर्थ

परीक्षित्! जब प्रातःकाल ऋषिलोग सोकर उठे और उन्होंने देखा कि कलशमें तो जल ही नहीं है, तब उन लोगोंने पूछा कि ‘यह किसका काम है? पुत्र उत्पन्‍न करनेवाला जल किसने पी लिया?’॥ २८॥✎ 1636

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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