श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.33

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

त्रसद्दस्युरितीन्द्रोऽङ्ग विदधे नाम तस्य१ वै।

यस्मात् त्रसन्ति ह्युद्वि‌ग्‍ना दस्यवो रावणादयः॥ ३३

trasaddasyuritīndro'ṅga vidadhe nāma tasya vai|

yasmāt trasanti hyudvignā dasyavo rāvaṇādayaḥ|| 33

अर्थ

परीक्षित्! इन्द्रने उस बालकका नाम रखा त्रसद्दस्यु, क्योंकि रावण आदि दस्यु (लुटेरे) उससे उद्वि‌ग्‍न एवं भयभीत रहते थे॥ ३३॥✎ 1636

टिप्पणियाँ

  1. १

    यस्य।

    (मुद्रित पृष्ठ 35)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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