श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.34

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यौवनाश्‍वोऽथ मान्धाता चक्रवर्त्यवनीं प्रभुः।

सप्तद्वीपवतीमेकः शशासाच्युततेजसा॥ ३४

yauvanāśvo'tha māndhātā cakravartyavanīṃ prabhuḥ|

saptadvīpavatīmekaḥ śaśāsācyutatejasā|| 34

अर्थ

युवनाश्‍वके पुत्र मान्धाता (त्रसद्दस्यु) चक्रवर्ती राजा हुए। भगवान्‌के तेजसे तेजस्वी होकर उन्होंने अकेले ही सातों द्वीपवाली पृथ्वीका शासन किया॥ ३४॥✎ 1636

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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