॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.6.36
द्रव्यं मन्त्रो विधिर्यज्ञो यजमानस्तथर्त्विजः।
धर्मो देशश्च कालश्च सर्वमेतद् यदात्मकम्॥ ३६
dravyaṃ mantro vidhiryajño yajamānastathartvijaḥ|
dharmo deśaśca kālaśca sarvametad yadātmakam|| 36
अर्थ
भगवान्के अतिरिक्त और है ही क्या? यज्ञकी सामग्री, मन्त्र, विधि-विधान, यज्ञ, यजमान, ऋत्विज्, धर्म, देश और काल—यह सब-का-सब भगवान्का ही स्वरूप तो है॥ ३६॥✎ 1636