sarvaṃ tad yauvanāśvasya māndhātuḥ kṣetramucyate|| 37
अर्थ
परीक्षित्! जहाँसे सूर्यका उदय होता है और जहाँ वे अस्त होते हैं, वह सारा-का-सारा भूभाग युवनाश्वके पुत्र मान्धाताके ही अधिकारमें था॥ ३७॥✎ 1636
यावत् सूर्य उदेति स्म यावच्च प्रतितिष्ठति।
सर्वं तद् यौवनाश्वस्य मान्धातुः क्षेत्रमुच्यते॥ ३७
परीक्षित्! जहाँसे सूर्यका उदय होता है और जहाँ वे अस्त होते हैं, वह सारा-का-सारा भूभाग युवनाश्वके पुत्र मान्धाताके ही अधिकारमें था॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 35) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/6/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)