दाँत उग आनेपर वरुणने कहा—‘अब इसके दाँत निकल आये, मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्चन्द्रने कहा— ‘जब इसके दूधके दाँत गिर जायँगे, तब यह यज्ञके योग्य होगा’॥ १२॥✎ 16372046
जाता दन्ता यजस्वेति स प्रत्याहाथ सोऽब्रवीत्।
यदा पतन्त्यस्य दन्ता अथ मेध्यो भवेदिति॥ १२
दाँत उग आनेपर वरुणने कहा—‘अब इसके दाँत निकल आये, मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्चन्द्रने कहा— ‘जब इसके दूधके दाँत गिर जायँगे, तब यह यज्ञके योग्य होगा’॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 39) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/7/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)