श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.1

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अथाष्टमोऽध्यायः

सगर-चरित्र

श्रीशुक १ उवाच

हरितो रोहितसुतश्‍चम्पस्तस्माद् विनिर्मिता।

चम्पापुरी सुदेवोऽतो विजयो यस्य चात्मजः॥ १

harito rohitasutaścampastasmād vinirmitā|

campāpurī sudevo'to vijayo yasya cātmajaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—रोहितका पुत्र था हरित। हरितसे चम्प हुआ। उसीने चम्पापुरी बसायी थी। चम्पसे सुदेव और उसका पुत्र विजय हुआ॥ १॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    बादरायणिरुवाच।

    (मुद्रित पृष्ठ 41)

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