॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.8.13
न साधुवादो मुनिकोपभर्जिता
नृपेन्द्रपुत्रा इति सत्त्वधामनि।
कथं तमो रोषमयं विभाव्यते
जगत्पवित्रात्मनि खे रजो भुवः॥ १३
na sādhuvādo munikopabharjitā
nṛpendraputrā iti sattvadhāmani|
kathaṃ tamo roṣamayaṃ vibhāvyate
jagatpavitrātmani khe rajo bhuvaḥ|| 13
अर्थ
परीक्षित्! सगरके लड़के कपिलमुनिके क्रोधसे जल गये, ऐसा कहना उचित नहीं है। वे तो शुद्ध सत्त्वगुणके परम आश्रय हैं। उनका शरीर तो जगत्को पवित्र करता रहता है। उनमें भला क्रोधरूप तमोगुणकी सम्भावना कैसे की जा सकती है। भला, कहीं पृथ्वीकी धूलका भी आकाशसे सम्बन्ध होता है?॥ १३॥