श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अद्य नः सर्वभूतात्मन् कामकर्मेन्द्रियाशयः।

मोहपाशो दृढश्छिन्‍नो भगवंस्तव दर्शनात्॥ २७

adya naḥ sarvabhūtātman kāmakarmendriyāśayaḥ|

mohapāśo dṛḍhaśchinno bhagavaṃstava darśanāt|| 27

अर्थ

समस्त प्राणियोंके आत्मा प्रभो! आज आपके दर्शनसे मेरे मोहकी वह दृढ़ फाँसी कट गयी जो कामना, कर्म और इन्द्रियोंको जीवनदान देती है॥ २७॥

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