श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

वृद्धं तं पंचतां प्राप्तं महिष्यनु मरिष्यती।

और्वेण जानताऽऽत्मानं प्रजावन्तं निवारिता॥ ३

vṛddhaṃ taṃ paṃcatāṃ prāptaṃ mahiṣyanu mariṣyatī|

aurveṇa jānatā''tmānaṃ prajāvantaṃ nivāritā|| 3

अर्थ

वनमें जानेपर बुढ़ापेके कारण जब बाहुककी मृत्यु हो गयी, तब उसकी पत्‍नी भी उसके साथ सती होनेको उद्यत हुई। परन्तु महर्षि और्वको यह मालूम था कि इसे गर्भ है। इसलिये उन्होंने उसे सती होनेसे रोक दिया॥ ३॥

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