श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.4

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

आज्ञायास्यै सपत्‍नीभिर्गरो दत्तोऽन्धसा सह।

सह३ तेनैव संजातः सगराख्यो महायशाः॥ ४

ājñāyāsyai sapatnībhirgaro datto'ndhasā saha|

saha tenaiva saṃjātaḥ sagarākhyo mahāyaśāḥ|| 4

अर्थ

जब उसकी सौतोंको यह बात मालूम हुई तो उन्होंने उसे भोजनके साथ गर (विष) दे दिया। परन्तु गर्भपर उस विषका कोई प्रभाव नहीं पड़ा; बल्कि उस विषको लिये हुए ही एक बालकका जन्म हुआ जो गरके साथ पैदा होनेके कारण ‘सगर’ कहलाया। सगर बड़े यशस्वी राजा हुए॥ ४॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    न हतस्तेन।

    (मुद्रित पृष्ठ 41)

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