॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.8.5
सगरश्चक्रवर्त्यासीत् सागरो यत्सुतैः कृतः।
यस्तालजंघान् यवनाञ्छकान् हैहयबर्बरान्॥ ५
sagaraścakravartyāsīt sāgaro yatsutaiḥ kṛtaḥ|
yastālajaṃghān yavanāñchakān haihayabarbarān|| 5
अर्थ
सगर चक्रवर्ती सम्राट् थे। उन्हींके पुत्रोंने पृथ्वी खोदकर समुद्र बना दिया था। सगरने अपने गुरुदेव और्वकी आज्ञा मानकर तालजंघ, यवन, शक, हैहय और बर्बर जातिके लोगोंका वध नहीं किया, बल्कि उन्हें विरूप बना दिया। उनमेंसे कुछके सिर मुड़वा दिये, कुछके मूँछ-दाढ़ी रखवा दी, कुछको खुले बालोंवाला बना दिया तो कुछको आधा मुँडवा दिया॥ ५-६॥