जो भक्तिके प्रवाहको बढ़ाता है और भगवान् श्रीकृष्णकी प्रसन्नताका प्रधान कारण है, मैं तुम्हें वह साधन बतलाता हूँ; उसे सावधान होकर सुनो॥ १०॥
भक्त्योघवर्धनं यच्च कृष्णसंतोषहेतुकम्।
तदहं तेऽभिधास्यामि सावधानतया शृणु॥ १०
जो भक्तिके प्रवाहको बढ़ाता है और भगवान् श्रीकृष्णकी प्रसन्नताका प्रधान कारण है, मैं तुम्हें वह साधन बतलाता हूँ; उसे सावधान होकर सुनो॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 34) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/10/