श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.13

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

परीक्षिते कथां वक्तुं सभायां संस्थिते शुके।

सुधाकुम्भं गृहीत्वैव देवास्तत्र समागमन्॥ १३

parīkṣite kathāṃ vaktuṃ sabhāyāṃ saṃsthite śuke|

sudhākumbhaṃ gṛhītvaiva devāstatra samāgaman|| 13

अर्थ

जब शुकदेवजी राजा परीक्षित‍्को यह कथा सुनानेके लिये सभामें विराजमान हुए, तब देवतालोग उनके पास अमृतका कलश लेकर आये॥ १३॥

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