श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.14

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

शुकं नत्वावदन् सर्वे स्वकार्यकुशलाः सुराः।

कथासुधां प्रयच्छस्व गृहीत्वैव सुधामिमाम्॥ १४

śukaṃ natvāvadan sarve svakāryakuśalāḥ surāḥ|

kathāsudhāṃ prayacchasva gṛhītvaiva sudhāmimām|| 14

अर्थ

देवता अपना काम बनानेमें बड़े कुशल होते हैं; अतः यहाँ भी सबने शुकदेवमुनिको नमस्कार करके कहा; ‘आप यह अमृत लेकर बदलेमें हमें कथामृतका दान दीजिये॥ १४॥

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