॥ श्रीहरिः ॥
तत्र घोरकलेर्योगात्पाखण्डैः खण्डिताङ्गका।
दुर्बलाहं चिरं याता पुत्राभ्यां सह मन्दताम्॥ ४९
tatra ghorakaleryogātpākhaṇḍaiḥ khaṇḍitāṅgakā|
durbalāhaṃ ciraṃ yātā putrābhyāṃ saha mandatām|| 49
अर्थ
वहाँ घोर कलियुगके प्रभावसे पाखण्डियोंने मुझे अंग-भंग कर दिया। चिरकालतक यह अवस्था रहनेके कारण मैं अपने पुत्रोंके साथ दुर्बल और निस्तेज हो गयी॥ ४९॥
तत्र घोरकलेर्योगात्पाखण्डैः खण्डिताङ्गका।
दुर्बलाहं चिरं याता पुत्राभ्यां सह मन्दताम्॥ ४९
वहाँ घोर कलियुगके प्रभावसे पाखण्डियोंने मुझे अंग-भंग कर दिया। चिरकालतक यह अवस्था रहनेके कारण मैं अपने पुत्रोंके साथ दुर्बल और निस्तेज हो गयी॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 37) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/1/49/