vada yoganidhe dhīman kāraṇaṃ cātra kiṃ bhavet|| 54
अर्थ
इसीसे मैं आश्चर्यचकित चित्तसे अपनी इस अवस्थापर शोक करती रहती हूँ। आप परम बुद्धिमान् एवं योगनिधि हैं; इसका क्या कारण हो सकता है, बताइये?॥ ५४॥
अतः शोचामि चात्मानं विस्मयाविष्टमानसा।
वद योगनिधे धीमन् कारणं चात्र किं भवेत्॥ ५४
इसीसे मैं आश्चर्यचकित चित्तसे अपनी इस अवस्थापर शोक करती रहती हूँ। आप परम बुद्धिमान् एवं योगनिधि हैं; इसका क्या कारण हो सकता है, बताइये?॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 38) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/1/54/