श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.57

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

नारद उवाच

शृणुष्वावहिता बाले युगोऽयं दारुणः कलिः।

तेन लुप्तः सदाचारो योगमार्गस्तपांसि च॥ ५७

śṛṇuṣvāvahitā bāle yugo'yaṃ dāruṇaḥ kaliḥ|

tena luptaḥ sadācāro yogamārgastapāṃsi ca|| 57

अर्थ

नारदजीने कहा—देवि! सावधान होकर सुनो। यह दारुण कलियुग है। इसीसे इस समय सदाचार, योगमार्ग और तप आदि सभी लुप्त हो गये हैं॥ ५७॥

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