श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.64

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

करुणापरेण हरिणाप्यधर्मः कथमीक्ष्यते।

इमं मे संशयं छिन्धि त्वद्वाचा सुखितास्म्यहम्॥ ६४

karuṇāpareṇa hariṇāpyadharmaḥ kathamīkṣyate|

imaṃ me saṃśayaṃ chindhi tvadvācā sukhitāsmyaham|| 64

अर्थ

करुणामय श्रीहरिसे भी यह अधर्म कैसे देखा जाता है? मुने! मेरा यह संदेह दूर कीजिये, आपके वचनोंसे मुझे बड़ी शान्ति मिली है॥ ६४॥

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