श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.10

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

कलौ मुक्तिः क्षयं प्राप्ता पाखण्डामयपीडिता।

त्वदाज्ञया गता शीघ्रं वैकुण्ठं पुनरेव सा॥ १०

kalau muktiḥ kṣayaṃ prāptā pākhaṇḍāmayapīḍitā|

tvadājñayā gatā śīghraṃ vaikuṇṭhaṃ punareva sā|| 10

अर्थ

कलियुगमें तुम्हारी दासी मुक्ति पाखण्डरूप रोगसे पीड़ित होकर क्षीण होने लगी थी, इसलिये वह तो तुरन्त ही तुम्हारी आज्ञासे वैकुण्ठलोकको चली गयी॥ १०॥

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