na te paśyanti kīnāśaṃ svapne'pyamalamūrtayaḥ|| 16
अर्थ
जिनके हृदयमें निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्तःकरण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते॥ १६॥
येषां चित्ते वसेद्भक्तिः सर्वदा प्रेमरूपिणी।
न ते पश्यन्ति कीनाशं स्वप्नेऽप्यमलमूर्तयः॥ १६
जिनके हृदयमें निरन्तर प्रेमरूपिणी भक्ति निवास करती है, वे शुद्धान्तःकरण पुरुष स्वप्नमें भी यमराजको नहीं देखते॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 41) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/16/