श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.17

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

न प्रेतो न पिशाचो वा राक्षसो वासुरोऽपि वा।

भक्तियुक्तमनस्कानां स्पर्शने न प्रभुर्भवेत्॥ १७

na preto na piśāco vā rākṣaso vāsuro'pi vā|

bhaktiyuktamanaskānāṃ sparśane na prabhurbhavet|| 17

अर्थ

जिनके हृदयमें भक्ति महारानीका निवास है, उन्हें प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि स्पर्श करनेमें भी समर्थ नहीं हो सकते॥ १७॥

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