॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.2.18
न तपोभिर्न वेदैश्च न ज्ञानेनापि कर्मणा।
हरिर्हि साध्यते भक्त्या प्रमाणं तत्र गोपिकाः॥ १८
na tapobhirna vedaiśca na jñānenāpi karmaṇā|
harirhi sādhyate bhaktyā pramāṇaṃ tatra gopikāḥ|| 18
अर्थ
तप, वेदाध्ययन, ज्ञान और कर्म आदि किसी भी साधनसे भगवान् वशमें नहीं किये जा सकते; वे केवल भक्तिसे ही वशीभूत होते हैं। इसमें श्रीगोपीजन प्रमाण हैं॥ १८॥