श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.21

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अलं व्रतैरलं तीर्थैरलं योगैरलं मखैः।

अलं ज्ञानकथालापैर्भक्तिरेकैव मुक्तिदा॥ २१

alaṃ vratairalaṃ tīrthairalaṃ yogairalaṃ makhaiḥ|

alaṃ jñānakathālāpairbhaktirekaiva muktidā|| 21

अर्थ

बस, बस—व्रत, तीर्थ, योग, यज्ञ और ज्ञानचर्चा आदि बहुत-से साधनोंकी कोई आवश्यकता नहीं है; एकमात्र भक्ति ही मुक्ति देनेवाली है॥ २१॥

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