॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.2.21
अलं व्रतैरलं तीर्थैरलं योगैरलं मखैः।
अलं ज्ञानकथालापैर्भक्तिरेकैव मुक्तिदा॥ २१
alaṃ vratairalaṃ tīrthairalaṃ yogairalaṃ makhaiḥ|
alaṃ jñānakathālāpairbhaktirekaiva muktidā|| 21
अर्थ
बस, बस—व्रत, तीर्थ, योग, यज्ञ और ज्ञानचर्चा आदि बहुत-से साधनोंकी कोई आवश्यकता नहीं है; एकमात्र भक्ति ही मुक्ति देनेवाली है॥ २१॥