सूतजी कहते हैं—इस प्रकार नारदजीके निर्णय किये हुए अपने माहात्म्यको सुनकर भक्तिके सारे अंग पुष्ट हो गये और वे उनसे कहने लगीं॥ २२॥
इति नारदनिर्णीतं स्वमाहात्म्यं निशम्य सा।
सर्वाङ्गपुष्टिसंयुक्ता नारदं वाक्यमब्रवीत्॥ २२
सूतजी कहते हैं—इस प्रकार नारदजीके निर्णय किये हुए अपने माहात्म्यको सुनकर भक्तिके सारे अंग पुष्ट हो गये और वे उनसे कहने लगीं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 42) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/22/