श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.22

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सूत उवाच

इति नारदनिर्णीतं स्वमाहात्म्यं निशम्य सा।

सर्वाङ्गपुष्टिसंयुक्ता नारदं वाक्यमब्रवीत्॥ २२

iti nāradanirṇītaṃ svamāhātmyaṃ niśamya sā|

sarvāṅgapuṣṭisaṃyuktā nāradaṃ vākyamabravīt|| 22

अर्थ

सूतजी कहते हैं—इस प्रकार नारदजीके निर्णय किये हुए अपने माहात्म्यको सुनकर भक्तिके सारे अंग पुष्ट हो गये और वे उनसे कहने लगीं॥ २२॥

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