॥ श्रीहरिः ॥
एतदर्थं तु सत्कर्म सुरर्षे त्वं समाचर।
तत्ते कर्माभिधास्यन्ति साधवः साधुभूषणाः॥ ३२
etadarthaṃ tu satkarma surarṣe tvaṃ samācara|
tatte karmābhidhāsyanti sādhavaḥ sādhubhūṣaṇāḥ|| 32
अर्थ
देवर्षे! इसके लिये तुम एक सत्कर्म करो, वह कर्म तुम्हें संतशिरोमणि महानुभाव बतायेंगे॥ ३२॥✎ 1966
एतदर्थं तु सत्कर्म सुरर्षे त्वं समाचर।
तत्ते कर्माभिधास्यन्ति साधवः साधुभूषणाः॥ ३२
देवर्षे! इसके लिये तुम एक सत्कर्म करो, वह कर्म तुम्हें संतशिरोमणि महानुभाव बतायेंगे॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 43) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी