उस सत्कर्मका अनुष्ठान करते ही क्षणभरमें इनकी नींद और वृद्धावस्था चली जायँगी तथा सर्वत्र भक्तिका प्रसार होगा’॥ ३३॥✎ 1966
सत्कर्मणि कृते तस्मिन् सनिद्रा वृद्धतानयोः।
गमिष्यति क्षणाद्भक्तिः सर्वतः प्रसरिष्यति॥ ३३
उस सत्कर्मका अनुष्ठान करते ही क्षणभरमें इनकी नींद और वृद्धावस्था चली जायँगी तथा सर्वत्र भक्तिका प्रसार होगा’॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 43) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी