श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.33

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सत्कर्मणि कृते तस्मिन् सनिद्रा वृद्धतानयोः।

गमिष्यति क्षणाद्भक्तिः सर्वतः प्रसरिष्यति॥ ३३

satkarmaṇi kṛte tasmin sanidrā vṛddhatānayoḥ|

gamiṣyati kṣaṇādbhaktiḥ sarvataḥ prasariṣyati|| 33

अर्थ

उस सत्कर्मका अनुष्ठान करते ही क्षणभरमें इनकी नींद और वृद्धावस्था चली जायँगी तथा सर्वत्र भक्तिका प्रसार होगा’॥ ३३॥✎ 1966

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी

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