यह आकाशवाणी वहाँ सभीको साफ-साफ सुनायी दी। इससे नारदजीको बड़ा विस्मय हुआ और वे कहने लगे, ‘मुझे तो इसका कुछ आशय समझमें नहीं आया’॥ ३४॥✎ 1966
इत्याकाशवचः स्पष्टं तत्सर्वैरपि विश्रुतम्।
नारदो विस्मयं लेभे नेदं ज्ञातमिति ब्रुवन्॥ ३४
यह आकाशवाणी वहाँ सभीको साफ-साफ सुनायी दी। इससे नारदजीको बड़ा विस्मय हुआ और वे कहने लगे, ‘मुझे तो इसका कुछ आशय समझमें नहीं आया’॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 43) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1966 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): सुनाई → सुनायी