नारदजी बोले—इस आकाशवाणीने भी गुप्त-रूपमें ही बात कही है। यह नहीं बताया कि वह कौन-सा साधन किया जाय जिससे इनका कार्य सिद्ध हो॥ ३५॥✎ 1563
अनयाऽऽकाशवाण्यापि गोप्यत्वेन निरूपितम्।
किं वा तत्साधनं कार्यं येन कार्यं भवेत्तयोः॥ ३५
नारदजी बोले—इस आकाशवाणीने भी गुप्त-रूपमें ही बात कही है। यह नहीं बताया कि वह कौन-सा साधन किया जाय जिससे इनका कार्य सिद्ध हो॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 43) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)