श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

क्‍व भविष्यन्ति सन्तस्ते कथं दास्यन्ति साधनम्।

मयात्र किं प्रकर्तव्यं यदुक्तं व्योमभाषया॥ ३६

kva bhaviṣyanti santaste kathaṃ dāsyanti sādhanam|

mayātra kiṃ prakartavyaṃ yaduktaṃ vyomabhāṣayā|| 36

अर्थ

वे संत न जाने कहाँ मिलेंगे और किस प्रकार उस साधनको बतायेंगे? अब आकाशवाणीने जो कुछ कहा है, उसके अनुसार मुझे क्या करना चाहिये?॥ ३६॥✎ 1563

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1563 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आकाश-वाणीने → आकाशवाणीने

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