आपको आकाशवाणीने जिस सत्कर्मका संकेत किया है, उसे हम बतलाते हैं; आप प्रसन्न और समाहितचित्त होकर सुनिये॥ ५८॥✎ 11
सत्कर्म तव निर्दिष्टं व्योमवाचा तु यत्पुरा।
तदुच्यते शृणुष्वाद्य स्थिरचित्तः प्रसन्नधीः॥ ५८
आपको आकाशवाणीने जिस सत्कर्मका संकेत किया है, उसे हम बतलाते हैं; आप प्रसन्न और समाहितचित्त होकर सुनिये॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 45) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/58/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)