पण्डितोंने ज्ञानयज्ञको ही सत्कर्म (मुक्तिदायक कर्म)का सूचक माना है। वह श्रीमद्भागवतका पारायण है, जिसका गान शुकादि महानुभावोंने किया है॥ ६०॥✎ 1564
सत्कर्मसूचको नूनं ज्ञानयज्ञः स्मृतो बुधैः।
श्रीमद्भागवतालापः स तु गीतः शुकादिभिः॥ ६०
पण्डितोंने ज्ञानयज्ञको ही सत्कर्म (मुक्तिदायक कर्म)का सूचक माना है। वह श्रीमद्भागवतका पारायण है, जिसका गान शुकादि महानुभावोंने किया है॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 45) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/60/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)