श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.61

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

भक्तिज्ञानविरागाणां तद्घोषेण बलं महत्।

व्रजिष्यति द्वयोः कष्टं सुखं भक्तेर्भविष्यति॥ ६१

bhaktijñānavirāgāṇāṃ tadghoṣeṇa balaṃ mahat|

vrajiṣyati dvayoḥ kaṣṭaṃ sukhaṃ bhakterbhaviṣyati|| 61

अर्थ

उसके शब्द सुननेसे ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्यको बड़ा बल मिलेगा। इससे ज्ञान-वैराग्यका कष्ट मिट जायगा और भक्तिको आनन्द मिलेगा॥ ६१॥✎ 1564

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1564 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कर्म)-का → कर्म)का

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