॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.2.64
नारद उवाच
वेदवेदान्तघोषैश्च गीतापाठैः प्रबोधितम्।
भक्तिज्ञानविरागाणां नोदतिष्ठत्त्रिकं यदा॥ ६४
vedavedāntaghoṣaiśca gītāpāṭhaiḥ prabodhitam|
bhaktijñānavirāgāṇāṃ nodatiṣṭhattrikaṃ yadā|| 64
अर्थ
नारदजीने कहा—मैंने वेद-वेदान्तकी ध्वनि और गीतापाठ करके उन्हें बहुत जगाया, किंतु फिर भी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य—ये तीनों नहीं जगे॥ ६४॥